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'यमुना खादर को सुधारने पर खर्च होंगे 120 करोड़ रुपये'

77 Days ago

इस कार्यक्रम का आयोजन श्रीश्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग ने किया है। समिति ने 21 फरवरी को एनजीटी में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में कहा है कि इस आयोजन के लिए यमुना खादर क्षेत्र के सभी प्राकृतिक वनस्पतियों को नष्ट कर दिया गया और इसका असर लंबे समय तक रहेगा।

इस रिपोर्ट में कहा गया है, "इस क्षेत्र से सभी प्राकृतिक वनस्पतियों को साफ कर दिया गया। वहां स्टील की छड़ों से मंच का निर्माण करने के लिए बड़ी-बड़ी जेसीबी मशीनों का प्रयोग किया गया और ढेर सारा मलबा यमुना नदी में डाल दिया गया।"

इस विशेषज्ञ समिति का नेतृत्व जल संसाधन सचिव शशीम शेखर ने किया और उनके साथ आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर ए. के. गोसैन तथा प्रोफेशर सी. आर बाबू और प्रोफेसर बृज गोपाल ने स्थिति का जायजा लिया।

प्रो. बाबू ने आईएएनएस को बताया, "वहां जमीन को समतल बनाने के लिए उसे दबा दिया गया। इसके कारण अब बारिश का पानी जमीन के अंदर नहीं जा पाएगा। इस कार्यक्रम के लिए नमभूमि को नुकसान पहुंचाया गया। साथ ही जलीय पौधों और वनस्पतियों को भी मिटा दिया गया।"

बाबू के मुताबिक अब इस क्षेत्र को पहले जैसी स्थिति में लाने के लिए कम से कम 120 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक जलमार्ग के समीप के 100 मीटर के क्षेत्र में किसी प्रकार की गतिविधि नहीं होनी चाहिए।

बाबू ने आगे कहा, "चूंकि नुकसान हो चुका था इसलिए अंतिम समय को आयोजन को रोकने का कोई फायदा नहीं था। इसलिए हमने एनजीटी से कम से कम 120 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने की सिफारिश की थी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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