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जीसस क्राइस्ट थे तमिल ब्राम्हण जानिए क्या है पूरा माजरा

122 Days ago
| by AMB LIVE

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दुनिया में बहुत सारे अलग लोग है। लोग अलग होने के साथ-साथ उनका धर्म भी अलग है। आज से 77 साल पहले हिंदुत्व विचारधारावादी विनायक दामोदर सावरकर के भाई ने एक ऐसी किताब लिखी थी जिसके ऊपर उस वक़्त जमकर विवाद हुआ था। मगर इतने साल बाद इस किताब को अब फिर से लॉन्च किया जा रहा है। इस किताब के विवादों में आने का कारण इसमें किये हुए दवे हैं। इस किताब के मुताबिक जीसस क्राइस्ट एक तमिल हिंदू थे। चलिए आपको बतातें है इस किताब में लिखी रोचक बातें जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे।


एक अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक, इस किताब को गणेश सावरकर ने लिखी जो की विनायक दामोदर सावरकर के बड़े भाई थे। आपको बता दें की इस किताब को इस 26 फ़रवरी को हिंदुत्व के आइकन के बरसी के दिन लॉन्च किया जाएगा। इस बात की जानकारी रंजीत सावरकर ने दी है। आपको बता दें की रंजीत सावरकर ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर नेशनल मेमोरियल’ के अध्यक्ष हैं। आपको अब हम जो बताने जा रहे हैं अपने शायद ही कही पढ़ा होगा। इस किताब के मुताबिक जीसस क्राइस्ट एक तमिल हिंदू थे। यही नहीं जब उनको एसीन पंथ ने क्रॉस पर चढ़ाए जाने पर उन्हें बचाया था तब उनका इलाज हिमालय के हरे पौधों से बनी अौषधी से किया गया था। इस किताब में यह भी दावा किया गया है की कश्मीर में ही जीसस ने अपनी समाधी लीं है। 
इस किताब को सबसे पहले सन 1946 में लॉन्च किया गया था। इस किताब को फ़िलहाल नेशनल मेमोरियल की तरफ से केवल मराठी भाषा में लाया जा रहा है। इस किताब में यह भी दावा किया गया है की जीसस जन्म विश्वकर्मा ब्राह्मण धर्म में हुआ था। वहीं उनका असली नाम केशव कृष्ण है। 

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